मकान की कीमत (Short Story)

एक दशक पूर्व जब अपन शिकागो में अवतरित हुए थे तो इसकी बर्फीली सर्द हवाओं ने तो अपनी कुल्फी ही जमा दी थी। सांस्कृतिक झटका लगा सो अलग उस पर देश और अपनों से दूर होने का दर्द – हमें लगा नहीं था हम ज़्यादा दिन टिक पाएंगे यहाँ। पर अब यहाँ की सर्द हवाओं से टीकाकृत हुए इतना अरसा हो गया है कि अब ना जमती हमारी कुल्फी, अलबत्ता अब तो ये शिकागो नगरी ही हमको जम गयी! पेंशन वाली सरकारी नौकरी और अपना खुद का आलिशान मकान – इसके सिवा और जीने को क्या चाहिए।

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हिंदुस्तान की ही तरह यहाँ अमरीका की सरकारी नौकरियों में भी पूरा समर्पण और कड़ी मेहनत लगती है। आप में खूब चाय-कॉफ़ी पीने और घंटों गप-शप करने यां इंटरनेट पर सर्फिंग करने की क्षमता होनी अनिवार्य है। चाय-कॉफ़ी से तो मम्मी ने बचपन से ही यह बोल के डराया हुआ था कि “मत पी बेटा, काला हो जायेगा” और गप-शप को हमने विवाद बनते इतना देखा था की इससे तौबा की हुई थी, तो अपने जॉब-प्रोफाइल का प्रमुख और अनकहा दायित्व इंटरनेट पर सर्फिंग करना ही था।

इसी दायित्व को निभाते हुए फेसबुक, शेयर मार्किट और क्रिकेट न्यूज़ के बाद हम ‘रेडफिन’ और ‘ज़िलो’ नामक वेब-साइट्स पर अपने मकान की कीमत को रोज़ बढ़ते देखकर ख़ुशी से मूछों पर ताव दिया करते थे। लेकिन पिछले तीन-चार महीने से देख रहे हैं कि हमारे मकान की कीमत गिरने लगी है जब कि शिकागो में औसतन तो घरों की कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं। अपने रियल-एस्टेट के जानकार मित्र को फ़ोन लगाया तो पता चला कि हमारे मोहल्ले में एक ओल्ड-ऐज होम (वृद्धाश्रम) के खुलने की वजह से हमारे मोहल्ले के घरों के दाम में गिरावट आयी है। इसका कारण तो नहीं पूछा पर उन अमरीकी बच्चो को मन में खूब कोसा जो अपने माँ-बाप को बुढ़ापे में ओल्ड-ऐज होम में सड़ने के लिए छोड़ जाते हैं। ना वो ऐसा करते और ना ये ओल्ड-ऐज होम बनाना पड़ता और ना हमारे मकान की कीमत गिरती।

फिर एक शाम टहलते हुए उस ओल्ड-ऐज होम से गुज़रना हुआ तो बाहर “वालंटियर्स नीडेड” का बोर्ड देखकर मैं अंदर चला गया। रिसेप्शन पर बैठी मोहतरमा स्टेफनी ने बताया की स्टाफ की कमी की वजह से उन्हें वालंटियर्स की ज़रुरत थी। मैंने सप्ताहांत में अपनी उपलब्धता ज़ाहिर की तो स्टेफनी ने मुझे ईमारत का एक दौरा करवाया। पहले कमरे में मारिया नामक सत्तर वर्षीय महिला से मुलाकात हुई जिनका दाखिला दो महीने पहले हुआ था। देखने में स्वस्थ ही लग रहीं थी। मुस्कुरा कर उन्होंने मुझे प्यार से “हैल्लो डियर!” कह कर सम्भोधित किया। मैंने भी सादर “गुड इवनिंग” कह कर उन्हें अपने दांतों के दर्शन करवाए। उनके पास एक युवक कटोरी-चमच लिए खड़ा था और उन्हें अपने हाथों से खिला रहा था। उसने यूनिफार्म नहीं पहनी थी तो मैंने अंदाज़ा लगाया की वह भी मेरी तरह वालंटियर ही होगा। प्रेमपूर्वक उन्हें खिलाने के बाद जब वो जाने लगा तो मारिया ने उसे थैंक्यू बोला और उसका नाम भी पूछा। उसने अपना नाम सैम बताया और झुक कर मारिया से गले मिलकर विदा ली। मैंने सोचा भगवान की लीला ही है जो एक द्वार बंद होने पर दूसरा खोल ही देते हैं। मारिया के बच्चों ने उसे यहाँ छोड़ दिया तो क्या ग़म, यहाँ उन्हें इतने अनजान लोगो से इतना स्नेह तो मिल ही रहा है।

पूरी ईमारत का दौरा करने के बाद मैं स्टेफनी के साथ जब रिसेप्शन पर लौटा तो देखा सैम वहीँ एक सोफे पर बैठा मैगज़ीन पढ़ रहा था। मैंने उससे पूछा कि वो घर नहीं गया अब तक तो बोला कि उन्हें डिनर करवा कर रात को घर जायेगा। जाने से पहले मैंने स्टेफनी से पूछा कि सैम कितने घंटे वालंटियर करता है तो उसने बताया की सैम वालंटियर नहीं बल्कि विज़िटर है और मारिया उसकी माँ है जो Dementia की मरीज़ है। इस बीमारी के चलते उनकी यादाश्त आती-जाती रहती है – अक्सर अपने बच्चों के नाम तक भूल जाती हैं और यहाँ आने से पहले तो कई बार बीच रात में पैदल ही घर से दूर निकल लेती थीं। इसलिए उन्हें चौबीस घंटे देखभाल और निगरानी की ज़रुरत है। सैम और उसकी बहन क्रिस्टीना बारी-बारी से यहाँ रोज़ आते हैं। क्रिस्टीना मारिया को अपने हाथों से लंच कराती है और उनकी पसंदीदा नोवेल्स पढ़ के सुनाती और शाम को सैम आकर उनके साथ वक़्त बिताता है और उन्हें डिनर खिला कर ही वापस जाता है।

मेरे मकान की कीमत भले ही गिर गयी हो पर मेरी नज़रों में आज अपनी कर्म-भूमि (अमेरिका) के लोगों की कीमत ज़रूर बढ़ गयी है।

© अजेय मागो ‘हाज़िर’

Published by Ajay Mago 'Haazir'

Ajay Mago is an India-Born IT professional currently residing in Northern California. He writes poetry and short stories in his spare time. He writes in both Hindi and English languages and adopts a free-flowing writing style. Ajay attempts to weave a humorous spin as he pens down his thoughts and observations, predominantly about human relationships and the things/events that he witnesses in the contemporary world. He considers himself a true witness to the happenings in this movie scripted by God and so he assumes the pen name of “Haazir“ - Ajay Mago 'Haazir' (अजेय मागो ‘हाज़िर’) Connect with Ajay on Facebook Connect with Ajay on YouTube Read Ajay's Blog on WordPress Ajay's Books Published on Amazon

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