दफ़्न

ज़िन्दगी में बेशुमार बने दोस्त अपने,थे यारो की महफ़िल में चर्चे अपने।पर यार-गद्दार दुनिया में इतने मिले,के दफ़्न कर दी अब दोस्ती हमने। न तुझसे मुलाकात के बने सिलसिले,दिल तरसता रहा तू कभी तो मिले।आशिक़ पर इक नज़र जो तेरी पड़े,दफ़्न कर दूँ आज सारे शिकवे-गिले। फ़िक्र-ओ-मुश्किल का है मारा जहाँ,चैन ढूंढे भी गर तोContinue reading “दफ़्न”

पत्थर

पत्थर लगा जब क़ैस को,सुनते हैं लैला को दुखा।पत्थर लगा जब यहां ,शायद दर्द हुआ वहां।पर यक़ीनन अब यहां,रत्ती भर भी ना दुखा।आखिर वो आये तो यहां ,क्या ग़म जो अरसा हुआ।अफ़सोस लेकिन अब यहां ,एहसास-ओ-जज़्बात ग़ुम हुआ।वक़्त रहते गर इज़हार-ओ-मिलन होता,तो आज हर शिकवा मेरा दफ़न होता ।देर मगर अब बहुत हुई यहाँ परContinue reading “पत्थर”

गुफ़्तगू

ये मेरी मुझ ही से गुफ़्तगू है इस सफर की,के राही हूँ और राह बोलती न इस डगर की।निकल पड़ा हूँ सफर पर या निकाला गया हूँ,गाँव दूर और गलियां बंद हुई हैं इस नगर की। अँधेरी राह और थकने को अब मेरे कदम हैं,है मीलों फासले सोचूं क्या मुझमे वो दम है ।भूख संगिनीContinue reading “गुफ़्तगू”

ठोकर, हार, मायूसी…

क्यों ठोकर लगने पर ही आती है तेरी याद,क्यों ढूढ़ता हूँ तुझे, बस हार जाने के बाद,क्यों तोड़ देता हूँ वादा पिछली मुलाकात का,बहाना करता हूँ मसरूफियत का, हालात का। महफ़िल में, जाम में, जश्‍न-ए-जुनून के माहौल में,ख़याल तेरा आया नहीं सोचा न होगी किस हाल में,पर जब चांदनी हुई हवा ओर घिर आयी अँधेरीContinue reading “ठोकर, हार, मायूसी…”

What is Quarantine – ये ‘कोरंटाइन’ क्या चीज़ होती है?

ख़बर देख टीवी पर गुस्साए पांडेय-जी, बोले यह भी कोई तमीज़ होती है, कोई इस अज्ञानी को तनिक बतलायेगा कि ये ‘कोरंटाइन’ क्या चीज़ होती है? ज्ञानी अनगिनत, देश निराला, किस-किस के मुँह पे लगाएं ताला, दुबे-जी ने राज़ सारा खोल डाला, सुनो पांडेय-जी बात मेरी ध्यान से, सुनो ज़रा खोल के परदे कान के,Continue reading “What is Quarantine – ये ‘कोरंटाइन’ क्या चीज़ होती है?”

Path of Love – प्यार की राह पे

संग तेरे इस राह पे मैं जाऊँगा, संग तेरे उस राह पे मैं जाऊँगा, चाह तारों की तूने जो की अगर, तोड़ सारे फ़लक से मैं आऊँगा। चाँद सबका तो कुछ है चाहता नहीं, चाँद मेरा जो चाहे वो कर जाऊँगा, रुसवा जहाँ ने तुझे जो किया, तो रुसवा ज़माने को सारे मैं कर जाऊँगा।Continue reading “Path of Love – प्यार की राह पे”

पहले वाली सियाही

सूरज चाँद सितारे अब भी हैं,परबत वादी नज़ारे अब भी हैं,गुलज़ार में गुल-ओ-भँवरे अब भी हैं,सजनी सलोनी साजन बाँवरे अब भी हैं, दिलों में प्यार बेशुमार अब भी है,एक बरस के मौसम चार अब भी हैं,बारिश है पर इंद्रधनुष के आसार अब भी हैं,तोता-मैंना के रूमानी होने का विचार अब भी है। बहुत लिखा कोरोना,Continue reading “पहले वाली सियाही”

Lock Down

मत घबरा के नहीं पड़ा तक़दीर पे तेरी ख़ुदा का हथोड़ा, कौन कहता है कि इस आपदा ने तुझे कहीं का न छोड़ा। मत सोच कि तुझ में और एक कैदी में अब रहा अंतर थोड़ा, अंतर ज़मीन-आसमान का है भोले, एक ऊपर है तो एक अब भी नीचे, कैदी Lock-𝑼𝑷 में सड़े और तूContinue reading “Lock Down”

फ़ुरक़त बनी फ़ुर्सत

मांगे थे रब से जो फ़ुर्सत के दिन, वो अब जा के आये हैं,बैठक के गलीचे पर, हम दोनों हैं और बाहों में बाहें हैं।तू है, मैं हूँ और प्याली में गरमा-गरम कॉफ़ी है,और ना चाह बाक़ी कोई, जो है बस काफी है। दुनिया से दूर जो बसायी थी दुनिया हमने,अर्से बाद उस दुनिया मेंContinue reading “फ़ुरक़त बनी फ़ुर्सत”

मरहम

अल्लाह कर कृपा और राम कर रहम, जल्द मिले संसार को कोरोना की मरहम। बक़्श मेरे वतन को तो खाते हैं ये कसम, न हिन्दू न मुसलमां, बस इन्सां बनेंगे हम। – अजेय मागो ‘हाज़िर’

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